शिशु की वृद्धि

शिशु ग्रोथ पर्सेंटाइल: उस नंबर का असली मतलब क्या है

क्लिनिक या आंगनवाड़ी से मिला पर्सेंटाइल नंबर कोई अंक नहीं, एक तुलना है। यहाँ आसान भाषा में समझिए कि वह नंबर क्या कहता है, ग्रोथ चार्ट कैसे पढ़ें, और नंबर से ज़्यादा ट्रेंड क्यों मायने रखता है।

पर्सेंटाइल एक तुलना है, ग्रेड नहीं। 25वें पर्सेंटाइल का मतलब है कि उसी उम्र और लिंग के 100 स्वस्थ शिशुओं में से 25 आपके शिशु से छोटे हैं। इसमें पास या फेल जैसा कुछ नहीं होता, कम नंबर बुरा नहीं होता, और असली सवाल यह है कि आपका शिशु अपनी लाइन के साथ लगातार बढ़ रहा है या नहीं।

टीकाकरण वाले दिन क्लिनिक या आंगनवाड़ी से लौटते हुए बहुत से माता-पिता के दिमाग़ में बस एक नंबर घूमता रहता है। "बच्चा 15वें पर्सेंटाइल पर है" सुनते ही लगता है जैसे परीक्षा में कम अंक मिल गए हों, और शाम तक घर में सलाहों की बौछार शुरू हो जाती है। यह गाइड उसी नंबर को खोलकर समझाती है: वह नाप क्या रहा है, क्या नहीं, और ग्रोथ के बारे में सचमुच कौन-सी बात मायने रखती है।

पर्सेंटाइल का असल मतलब: यह तुलना है, रिपोर्ट कार्ड नहीं

ग्रोथ चार्ट में बहुत सारे शिशुओं को उम्र और लिंग के हिसाब से क्रम में लगाया गया होता है। जब डॉक्टर कहते हैं कि आपका शिशु 25वें पर्सेंटाइल पर है, तो इसका सीधा-सा मतलब इतना ही है: उसी उम्र और लिंग के 100 स्वस्थ शिशुओं की कतार में लगभग 25 आपके शिशु से छोटे होंगे और लगभग 75 बड़े। बस। यह कोई स्कोर या ग्रेड नहीं है।

यहाँ पास मार्क जैसी कोई चीज़ है ही नहीं। 50वाँ पर्सेंटाइल "सही" नहीं होता, वह बस बीच का बिंदु है, जहाँ आधे शिशु ऊपर होते हैं और आधे नीचे। किसी को तो नीचे वाले आधे में होना ही है, और वे शिशु ठीक उतने ही स्वस्थ होते हैं जितने ऊपर वाले।

इसे ऐसे देखिए: अगर हर शिशु 50वें पर्सेंटाइल पर होता, तो चार्ट का कोई मतलब ही न बचता। चार्ट बना ही इसलिए है क्योंकि स्वस्थ शिशु पूरी चौड़ाई में फैले होते हैं। परिभाषा से ही, हर बीस में से लगभग एक स्वस्थ शिशु सबसे नीचे वाली लाइन (तीसरे पर्सेंटाइल) से नीचे या सबसे ऊपर वाली लाइन (97वें पर्सेंटाइल) से ऊपर बैठता है और पूरी तरह ठीक होता है। ये लाइनें बीमारी की सरहद नहीं हैं, वे सिर्फ़ यह बताती हैं कि किन शिशुओं को डॉक्टर थोड़ा ज़्यादा ध्यान से देखना चाहेंगे। ध्यान से देखना और बीमार होना, दो अलग बातें हैं।

छोटे कद वाले माता-पिता के शिशु अक्सर चार्ट की नीचे वाली लाइनों के आसपास चलते हैं, और वही उनके लिए सही जगह हो सकती है। पड़ोस के गोल-मटोल बच्चे से तुलना आपको कोई काम की जानकारी नहीं देती, सिर्फ़ नींद ख़राब करती है।

पर्सेंटाइल क्या नहीं है, यह याद रखना ज़्यादा काम आता है:

  • यह अंक नहीं है। ऊँचा नंबर बेहतर नहीं होता और कम नंबर बुरा नहीं होता।
  • यह आपके दूध या खाने की गुणवत्ता का सर्टिफिकेट नहीं है।
  • यह अपने आप में कोई निदान नहीं है। कुपोषण या किसी बीमारी का फ़ैसला चार्ट के एक बिंदु से नहीं होता, डॉक्टर पूरी तस्वीर देखकर करते हैं।
  • यह भविष्य की लंबाई या ताक़त की भविष्यवाणी नहीं है।
  • यह माता-पिता होने की परीक्षा तो बिल्कुल नहीं है।

और एक बात साफ़ रहनी चाहिए: कोई वेबसाइट, कोई ऐप और कोई लेख यह नहीं बता सकता कि आपका शिशु स्वस्थ है या नहीं। यह सिर्फ़ आपके अपने डॉक्टर बता सकते हैं, जो शिशु को छूकर देखते हैं, जन्म का इतिहास जानते हैं और जिनके सामने पिछली सारी तौल मौजूद होती है।

ग्रोथ चार्ट कैसे पढ़ें

चार्ट में नीचे की तरफ़ उम्र होती है और बग़ल में माप, यानी वज़न, लंबाई या सिर का घेरा। बीच में जो घुमावदार लाइनें बनी होती हैं, वही पर्सेंटाइल लाइनें हैं। लड़कों और लड़कियों के चार्ट अलग-अलग होते हैं, इसलिए सबसे पहले यह देख लें कि सही चार्ट खुला है।

बिंदु लगाने का तरीक़ा आसान है। उम्र वाली सीध और माप वाली सीध जहाँ मिलती हैं, वहाँ एक बिंदु लगाइए, हर चेकअप पर एक नया बिंदु, और फिर बिंदुओं को जोड़ दीजिए। यही जुड़ी हुई रेखा आपके शिशु की अपनी ग्रोथ लाइन है, और असली जानकारी इसी रेखा में है, किसी अकेले बिंदु में नहीं।

आमतौर पर तीन चीज़ें नापी जाती हैं: उम्र के हिसाब से वज़न, उम्र के हिसाब से लंबाई (दो साल के बाद खड़े होकर ऊँचाई) और सिर का घेरा। भारत में सरकारी अस्पताल, ANM या आंगनवाड़ी से मिलने वाले माँ और शिशु सुरक्षा कार्ड (MCP कार्ड) में आमतौर पर उम्र के हिसाब से वज़न वाला चार्ट छपा होता है, जबकि निजी क्लिनिक अक्सर अपना प्रिंट किया हुआ चार्ट इस्तेमाल करते हैं।

अगर आपके कार्ड पर पर्सेंटाइल की जगह SD या z लिखा हो

कई कार्ड और सरकारी चार्ट पर्सेंटाइल की जगह SD लाइनें दिखाते हैं, जिन्हें z-स्कोर भी कहा जाता है, और कुछ पर हरी, पीली और लाल रंग की पट्टियाँ भी होती हैं। यह वही बात है, बस दूसरी भाषा में। बीच वाली 0 लाइन औसत यानी median है, वही जो 50वाँ पर्सेंटाइल है। उससे नीचे की लाइनें -1, -2 और -3 SD होती हैं और ऊपर की +1, +2 और +3 SD। नीचे वाली -2 SD लाइन लगभग तीसरे पर्सेंटाइल के आसपास पड़ती है और +2 SD लगभग 97वें के आसपास। रंगीन पट्टियाँ स्वास्थ्य कार्यकर्ता के लिए एक तेज़ इशारा भर हैं कि किस बच्चे को ज़्यादा ध्यान चाहिए, वे अपने आप में कोई निदान नहीं हैं।

जन्म के बाद वज़न का घटना, और एक अकेले माप की सीमा

पहला डर अक्सर अस्पताल में ही मिल जाता है। ज़्यादातर नवजात जन्म के बाद के पहले कुछ दिनों में अपने जन्म के वज़न का लगभग 7 से 10 प्रतिशत तक घटा लेते हैं। यह अपेक्षित है, इसमें शरीर का अतिरिक्त पानी निकलना भी शामिल है। इसके बाद वज़न फिर चढ़ने लगता है और आमतौर पर करीब दो हफ़्ते तक शिशु अपने जन्म के वज़न पर वापस आ जाता है। यही वह पहली बात है जो नए माता-पिता को सबसे ज़्यादा डराती है।

अगर वज़न इससे ज़्यादा गिरे, या दो हफ़्ते बाद भी जन्म का वज़न वापस न आए, तो यह घबराने की नहीं बल्कि जल्दी दिखाने की बात है। ऐसे में डॉक्टर या स्तनपान सलाहकार सबसे पहले दूध पिलाने का तरीक़ा, शिशु का लैच और चौबीस घंटे में गीले डायपर की गिनती देखते हैं।

इसके आगे भी, कोई एक अकेला माप बहुत कम बताता है, क्योंकि माप उतने पक्के होते नहीं जितने काग़ज़ पर दिखते हैं:

  • हर तराज़ू एक जैसी नहीं होती। आंगनवाड़ी की लटकने वाली तराज़ू, क्लिनिक की डिजिटल तराज़ू और घर का बाथरूम स्केल, तीनों अलग रीडिंग दे सकते हैं।
  • कपड़े और डायपर नंबर बढ़ा देते हैं। सर्दी में स्वेटर, टोपी और मोज़े, या एक भरा हुआ डायपर, चुपचाप वज़न ऊपर कर देते हैं।
  • समय भी मायने रखता है। दूध पिलाने के ठीक बाद और पॉटी के ठीक बाद का वज़न एक जैसा नहीं आएगा।
  • लंबाई नापना सबसे मुश्किल काम है। इसके लिए इन्फैंटोमीटर और दो लोगों की ज़रूरत होती है, क्योंकि शिशु टाँगें मोड़ता और हिलता रहता है। बिस्तर पर टेप से लिया गया माप अक्सर एक-दो सेंटीमीटर इधर-उधर हो जाता है।
  • नापने वाला व्यक्ति बदलने से भी नंबर बदल जाता है।

इसीलिए अगर लंबाई पिछली बार से "कम" निकल आई है, तो लगभग हमेशा यह माप की ग़लती होती है। शिशु सिकुड़ते नहीं हैं। ऐसे में सही क़दम यह है कि उसी समय दोबारा नाप लेने के लिए कहें, न कि रातभर नंबर को घूरते रहें।

माप को तुलना लायक कैसे बनाएँ

हो सके तो हर बार एक ही जगह और एक ही तराज़ू पर तौल करवाएँ। छोटे शिशु को बिना कपड़ों या सिर्फ़ सूखे डायपर में तौलें, और अगर कपड़ों समेत तौला गया है तो यह नोट कर लें। हर तारीख़ और हर नंबर लिखकर रखें, चाहे कार्ड पर या फ़ोन में।

नंबर नहीं, ट्रेंड देखिए: लाइन बदलना कब सामान्य है और कब नहीं

यह इस पूरे पेज की सबसे ज़रूरी बात है। नौवें पर्सेंटाइल पर चल रहा एक शिशु, जो महीने-दर-महीने अपनी लाइन के साथ-साथ आराम से बढ़ रहा है, आमतौर पर उस शिशु से बेहतर स्थिति में होता है जो दो महीनों में 75वें से 25वें पर आ गया है। पहला शिशु अपनी लाइन पर है। दूसरे शिशु में कुछ बदला है, और डॉक्टर को यही देखना है।

पहले चार से छह महीनों में बहुत से शिशु अपनी "अपनी" लाइन ढूँढ़ते हैं। जन्म का वज़न काफ़ी हद तक गर्भ के हालात पर निर्भर करता है, जबकि कुछ महीने बाद शिशु अपनी आनुवंशिक बनावट की तरफ़ बढ़ने लगता है। इसलिए धीरे-धीरे एक लाइन ऊपर या नीचे खिसकना अक्सर सामान्य होता है।

ये स्थितियाँ आमतौर पर सामान्य होती हैं:

  • पहले महीनों में धीरे-धीरे एक लाइन ऊपर या नीचे खिसकना, जबकि शिशु चुस्त है, अच्छा दूध पी रहा है और डायपर गीले कर रहा है।
  • जन्म के समय भारी रहे शिशु का कुछ महीनों में थोड़ा नीचे बैठ जाना, या कम वज़न वाले शिशु का धीरे-धीरे ऊपर चढ़ना।
  • स्तनपान करने वाले शिशुओं का शुरुआती महीनों में तेज़ बढ़ना और फिर करीब तीन से चार महीने बाद रफ़्तार धीमी कर देना।
  • दस्त, बुख़ार या किसी बीमारी के बाद वज़न का एक बार ठहर जाना और ठीक होने पर वापस चढ़ना।
  • करीब छह महीने पर ऊपरी आहार शुरू होने के दौर में रफ़्तार का थोड़ा बदल जाना।

और इन स्थितियों में डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है:

  • लगातार नीचे की तरफ़ दो बड़ी लाइनें पार कर जाना।
  • लगातार दो या उससे ज़्यादा तौल में वज़न का बिल्कुल न बढ़ना, या घट जाना (नवजात के पहले हफ़्ते को छोड़कर)।
  • वज़न के साथ-साथ लंबाई और सिर के घेरे की रफ़्तार भी सुस्त पड़ जाना।
  • चार्ट की चिंता के साथ-साथ शिशु का सुस्त रहना, कम दूध पीना, कम पेशाब आना, या विकास के पड़ाव पीछे रह जाना।

ध्यान रहे, यह सूची चेतावनी की घंटी है, फ़ैसला नहीं। इनमें से कुछ दिखने का मतलब यह नहीं कि गड़बड़ है, मतलब सिर्फ़ इतना है कि इसे डॉक्टर की नज़र से गुज़रना चाहिए। किस उम्र में वजन का सामान्य दायरा कितना होता है, यह देखने के लिए आप हमारी उम्र के हिसाब से बच्चे के वजन की तालिका में WHO के आंकड़े देख सकते हैं।

WHO, CDC और IAP चार्ट: आप पर कौन-सा लागू होता है

सारे ग्रोथ चार्ट एक जैसे नहीं होते, और यह फ़र्क़ मामूली नहीं है।

WHO चार्ट एक मानक (standard) हैं। ये बताते हैं कि अच्छी परिस्थितियों में पल रहे, स्तनपान करने वाले स्वस्थ बच्चे कैसे बढ़ते हैं। इनके लिए छह देशों में अध्ययन हुआ था, जिनमें भारत (दिल्ली) भी शामिल था। यानी ये चार्ट एक आदर्श जैसी तस्वीर देते हैं।

CDC चार्ट एक संदर्भ (reference) हैं। ये बताते हैं कि ज़्यादातर अमेरिकी और ज़्यादातर फ़ॉर्मूला दूध पीने वाली एक आबादी असल में कैसे बढ़ी थी। यह वर्णन है, आदर्श नहीं।

इसी वजह से स्तनपान करने वाला शिशु CDC चार्ट पर कुछ महीनों बाद अक्सर "पर्सेंटाइल गिराता" दिखता है, जबकि WHO चार्ट पर वही शिशु अपनी लाइन पर आराम से चल रहा होता है। शिशु नहीं बदला, तुलना का पैमाना बदल गया।

ज़्यादातर देश 0 से 2 साल के लिए WHO चार्ट इस्तेमाल करते हैं। भारत में भी सरकारी व्यवस्था और Indian Academy of Pediatrics (IAP) की सलाह पाँच साल से छोटे बच्चों के लिए WHO चार्ट की ओर जाती है, जबकि पाँच साल से बड़े बच्चों और किशोरों के लिए IAP के अपने चार्ट इस्तेमाल होते हैं।

चार्ट आपस में मत मिलाइए

जो चार्ट आपका क्लिनिक इस्तेमाल करता है, हर बार वही देखिए। किसी ऐप, किसी विदेशी वेबसाइट या किसी दूसरे चार्ट के नंबर को अपने कार्ड के नंबर के साथ मिलाकर मत पढ़िए। दो अलग पैमानों की तुलना से या तो बेवजह की चिंता मिलती है या झूठी तसल्ली। सबसे साफ़ नियम यही है: जो चार्ट आपका डॉक्टर इस्तेमाल करता है, वही आपका चार्ट है।

समय से पहले जन्मे शिशु और सुधारी हुई उम्र

अगर आपका शिशु समय से पहले जन्मा है, तो उसे कैलेंडर वाली उम्र पर चार्ट में लगाना ठीक नहीं होता। इसके लिए सुधारी हुई उम्र (corrected age) निकाली जाती है: जितने हफ़्ते पहले जन्म हुआ, उतने हफ़्ते कैलेंडर उम्र में से घटा दीजिए। मिसाल के लिए, आठ हफ़्ते पहले जन्मा शिशु जब कैलेंडर से छह महीने का होगा, तब उसकी सुधारी हुई उम्र चार महीने होगी, और चार्ट पर बिंदु चार महीने पर ही लगेगा।

यह सुधार आमतौर पर करीब दो साल की उम्र तक किया जाता है, हालाँकि अलग-अलग टीमें वज़न, लंबाई और सिर के घेरे के लिए इसे थोड़े अलग समय तक जारी रखती हैं। इस बारे में अपनी टीम की बात मानिए।

बहुत जल्दी जन्मे या बहुत कम वज़न वाले शिशुओं के लिए आमतौर पर अलग, प्रीटर्म चार्ट इस्तेमाल होते हैं, जो उनकी NICU या फ़ॉलो-अप टीम देती है। ऐसे शिशु की तुलना उसी तारीख़ को जन्मे पूरे महीने के शिशु से करना न सही है, न ज़रूरी।

हर माप एक जगह, ताकि ट्रेंड साफ़ दिखे

BabyMind में आप हर चेकअप के बाद वज़न, लंबाई और सिर का घेरा दर्ज कर सकते हैं और समय के साथ उनका बदलाव देख सकते हैं, जो इस पूरे पेज का मुद्दा है। यह ऐप न आधिकारिक WHO पर्सेंटाइल वक्र बनाता है, न कोई जाँच या निदान करता है, और न क्लिनिक की तौल की जगह लेता है। यह बस आपका अपना रिकॉर्ड एक जगह रखता है, ताकि अगली मुलाक़ात में डॉक्टर को पूरी कहानी दिखाई जा सके।

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डॉक्टर को कब दिखाएँ

ग्रोथ से जुड़ी ज़्यादातर चिंताएँ अगले चेकअप तक इंतज़ार कर सकती हैं। पर कुछ बातें ऐसी हैं जिन पर उसी दिन या जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए:

  • नवजात का वज़न पहले हफ़्ते के बाद भी गिरता रहे, या करीब दो हफ़्ते में जन्म का वज़न वापस न आए।
  • लगातार दो या उससे ज़्यादा तौल में वज़न न बढ़ना, या घट जाना।
  • चार्ट पर नीचे की तरफ़ दो बड़ी लाइनें पार कर जाना, या MCP कार्ड की सबसे नीचे वाली लाइन से नीचे चले जाना।
  • दूध ठीक से न पीना, दूध से इनकार, बहुत ज़्यादा सुस्ती, या शिशु का मुश्किल से जागना।
  • चौबीस घंटे में बहुत कम गीले डायपर, बहुत गाढ़ा पीला पेशाब, सूखा मुँह, या तालू का कोमल हिस्सा धँसा हुआ लगना।
  • बार-बार उल्टी, लगातार दस्त, मल में खून, या पेट का लगातार फूला रहना।
  • सिर का घेरा बहुत तेज़ी से बढ़ना या बिल्कुल न बढ़ना, या तालू का उभरा हुआ लगना।
  • वज़न की चिंता के साथ विकास के पड़ावों का पीछे छूट जाना, जैसे मुस्कुराना, गर्दन सँभालना या बैठना।
  • तीन महीने से छोटे शिशु में बुख़ार।
  • और वह नियम जो बाक़ी सब पर भारी है: अगर आपका मन कह रहा है कि कुछ ठीक नहीं है, तो दिखा लीजिए।

एक बात पर हम बहुत साफ़ रहना चाहते हैं। वज़न की चिंता में अपने आप ऊपर का दूध शुरू करना, फ़ॉर्मूला जोड़ना, दूध पतला करना, फ़ीड घटाना या बढ़ाना, या ऊपरी आहार जल्दी शुरू कर देना सही रास्ता नहीं है। घर और आस-पड़ोस से ऐसी सलाह ख़ूब मिलती है और नीयत भी अच्छी होती है, फिर भी दूध पिलाने में कोई भी बदलाव पहले अपने डॉक्टर, ANM या स्तनपान सलाहकार से बात करके ही करें। ग़लत बदलाव से एक छोटे शिशु को सचमुच नुक़सान हो सकता है, और सही बदलाव भी तभी काम करता है जब वह सही कारण के लिए किया जाए।

आख़िर में याद रखने लायक बात नंबर नहीं, लाइन है। यह लेख जानकारी के लिए है और आपके डॉक्टर की जगह नहीं लेता। जो भी खटके, उसे लिख लीजिए और अगली मुलाक़ात में डॉक्टर के सामने रख दीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरा शिशु 10वें पर्सेंटाइल पर है, क्या यह चिंता की बात है?

अपने आप में नहीं। यह सिर्फ़ इतना बताता है कि उसी उम्र और लिंग के ज़्यादातर स्वस्थ शिशु आपके शिशु से बड़े हैं और कुछ छोटे। अगर शिशु चुस्त है, अच्छा दूध पी रहा है, डायपर गीले कर रहा है और महीने-दर-महीने अपनी लाइन के साथ आगे बढ़ रहा है, तो नीचे वाला नंबर अपने आप में समस्या नहीं है। पक्का सिर्फ़ आपके डॉक्टर बता सकते हैं, क्योंकि उनके पास पिछली सारी तौल और पूरी जाँच होती है।

क्या 50वाँ पर्सेंटाइल सबसे अच्छा होता है?

नहीं। 50वाँ पर्सेंटाइल कोई लक्ष्य नहीं है, वह बस बीच का बिंदु है जहाँ आधे स्वस्थ शिशु ऊपर होते हैं और आधे नीचे। स्वस्थ शिशु चार्ट की पूरी चौड़ाई में फैले होते हैं, और डॉक्टर नंबर को ऊपर लाने की नहीं, बल्कि लगातार अपनी लाइन पर बढ़ते रहने की उम्मीद रखते हैं।

इस बार लंबाई पिछली बार से कम निकली, ऐसा कैसे हो सकता है?

शिशु सिकुड़ते नहीं हैं, इसलिए यह लगभग हमेशा नापने की ग़लती होती है। सही लंबाई नापने के लिए इन्फैंटोमीटर और दो लोगों की ज़रूरत होती है, क्योंकि शिशु टाँगें मोड़ता और हिलता रहता है, और बिस्तर पर टेप से लिया गया माप आसानी से इधर-उधर हो जाता है। सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि उसी समय दोबारा नापने के लिए कह दें।

स्तनपान करने वाला मेरा शिशु कुछ महीनों बाद पर्सेंटाइल गिराता क्यों दिख रहा है?

इसकी दो आम वजहें होती हैं। पहली, स्तनपान करने वाले शिशु शुरुआती महीनों में तेज़ बढ़ते हैं और उसके बाद रफ़्तार कुछ धीमी कर देते हैं, जो एक सामान्य पैटर्न है। दूसरी, अगर चार्ट CDC वाला है तो वह ज़्यादातर फ़ॉर्मूला पीने वाली आबादी का वर्णन करता है, इसलिए स्तनपान करने वाला शिशु उस पर नीचे खिसकता दिख सकता है, जबकि WHO चार्ट पर वही शिशु अपनी लाइन पर होता है। इस अंतर पर अपने डॉक्टर से बात करें और दूध पिलाने में अपने आप कोई बदलाव न करें।

समय से पहले जन्मे शिशु को चार्ट पर कहाँ लगाया जाए?

सुधारी हुई उम्र (corrected age) पर। जितने हफ़्ते पहले जन्म हुआ है, उतने हफ़्ते कैलेंडर उम्र में से घटा दीजिए, और यही सुधार आमतौर पर करीब दो साल की उम्र तक किया जाता है। बहुत जल्दी जन्मे शिशुओं के लिए आमतौर पर उनकी NICU या फ़ॉलो-अप टीम अलग प्रीटर्म चार्ट देती है, इसलिए उसी चार्ट और अपनी टीम की सलाह पर चलें।

वज़न कम बढ़ रहा है, क्या मैं ऊपर का दूध या फ़ॉर्मूला शुरू कर दूँ?

यह फ़ैसला अपने आप न लें। दूध पिलाने में कोई भी बदलाव, चाहे फ़ॉर्मूला जोड़ना हो, दूध पतला करना हो, फ़ीड घटाना या बढ़ाना हो, या ऊपरी आहार जल्दी शुरू करना हो, पहले अपने डॉक्टर, ANM या स्तनपान सलाहकार से बात करके ही करें। ग़लत बदलाव से छोटे शिशु को नुक़सान हो सकता है, और असली कारण पकड़े बिना कोई बदलाव मदद भी नहीं करता।