ज़्यादातर बच्चे पहले साल में करीब 25 सेंटीमीटर और दूसरे साल में करीब 12 सेंटीमीटर बढ़ते हैं। असली सवाल यह नहीं कि बच्चा किसी एक नंबर पर है, बल्कि यह कि उसकी लंबाई अपनी ही रेखा के साथ लगातार ऊपर जा रही है। नाप में एक से दो सेंटीमीटर का फर्क आम है।
उम्र के अनुसार लंबाई: चार्ट असल में क्या दिखाता है
भारत में पाँच साल से छोटे बच्चों के लिए लगभग हर जगह WHO के ग्रोथ स्टैंडर्ड इस्तेमाल होते हैं, चाहे सरकारी अस्पताल हो, आँगनवाड़ी हो या प्राइवेट क्लीनिक। यही रेखाएँ आपके मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड (MCP कार्ड) पर छपी होती हैं और यही आपके डॉक्टर की फ़ाइल में।
नीचे दी गई टेबल में हर उम्र के लिए तीन निशान हैं: नीचे की रेखा, बीच की रेखा और ऊपर की रेखा। बीच वाली रेखा कोई लक्ष्य नहीं है। यह सिर्फ़ वह जगह है जहाँ स्वस्थ बच्चों में से आधे ऊपर होते हैं और आधे नीचे। निचली रेखा के पास होने का मतलब पीछे रह जाना नहीं है, वैसे ही जैसे ऊपरी रेखा के पास होने का मतलब आगे निकल जाना नहीं है।
पर्सेंटाइल एक तुलना है, नंबर वाला रिज़ल्ट नहीं। ये रेखाएँ बनती कैसे हैं, "50वाँ पर्सेंटाइल" का मतलब क्या होता है और अपने बच्चे के बिंदुओं को कैसे पढ़ा जाता है, यह हमने ग्रोथ चार्ट और पर्सेंटाइल कैसे पढ़ें वाली गाइड में विस्तार से समझाया है।
| उम्र | 3वाँ पर्सेंटाइल (निचली रेखा) | 50वाँ पर्सेंटाइल (बीच की रेखा) | 97वाँ पर्सेंटाइल (ऊपरी रेखा) |
|---|---|---|---|
| जन्म के समय | 46.3 | 49.9 | 53.4 |
| 1 महीने | 51.1 | 54.7 | 58.4 |
| 2 महीने | 54.7 | 58.4 | 62.2 |
| 3 महीने | 57.6 | 61.4 | 65.3 |
| 4 महीने | 60.0 | 63.9 | 67.8 |
| 5 महीने | 61.9 | 65.9 | 69.9 |
| 6 महीने | 63.6 | 67.6 | 71.6 |
| 9 महीने | 67.7 | 72.0 | 76.2 |
| 12 महीने | 71.3 | 75.7 | 80.2 |
| 15 महीने | 74.4 | 79.1 | 83.9 |
| 18 महीने | 77.2 | 82.3 | 87.3 |
| 2 साल | 82.1 | 87.8 | 93.6 |
| उम्र | 3वाँ पर्सेंटाइल (निचली रेखा) | 50वाँ पर्सेंटाइल (बीच की रेखा) | 97वाँ पर्सेंटाइल (ऊपरी रेखा) |
|---|---|---|---|
| जन्म के समय | 45.6 | 49.1 | 52.7 |
| 1 महीने | 50.0 | 53.7 | 57.4 |
| 2 महीने | 53.2 | 57.1 | 60.9 |
| 3 महीने | 55.8 | 59.8 | 63.8 |
| 4 महीने | 58.0 | 62.1 | 66.2 |
| 5 महीने | 59.9 | 64.0 | 68.2 |
| 6 महीने | 61.5 | 65.7 | 70.0 |
| 9 महीने | 65.6 | 70.1 | 74.7 |
| 12 महीने | 69.2 | 74.0 | 78.9 |
| 15 महीने | 72.4 | 77.5 | 82.7 |
| 18 महीने | 75.2 | 80.7 | 86.2 |
| 2 साल | 80.3 | 86.4 | 92.5 |
फ़ोन पर पूरी टेबल देखने के लिए इसे दाएँ-बाएँ स्लाइड करें।
ये आँकड़े WHO चाइल्ड ग्रोथ स्टैंडर्ड्स से लिए गए हैं और पूरे महीने पर जन्मे (टर्म) बच्चों पर लागू होते हैं; समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए करेक्टेड ऐज या अपने डॉक्टर का बताया चार्ट इस्तेमाल करें।
टेबल देखते समय एक बात ध्यान रखें: दो साल तक लंबाई लेटाकर नापी जाती है और यही नंबर इन रेखाओं से मिलाया जाता है। बच्चे को खड़ा करके, दीवार पर निशान लगाकर या बिस्तर पर टेप रखकर लिया गया नंबर इन रेखाओं पर ठीक नहीं बैठेगा।
एक और बात जो भारत के क्लीनिकों में अक्सर होती है: वज़न हर विज़िट पर नाप लिया जाता है, लेकिन लंबाई कई बार छूट जाती है या जल्दबाज़ी में ले ली जाती है। टीकाकरण वाली विज़िट पर लंबाई भी नापने और कार्ड पर लिखवाने के लिए ख़ुद कहना बिलकुल ठीक है।
लंबाई असल में कितनी तेज़ी से बढ़ती है
माता-पिता आमतौर पर कुल लंबाई पूछते हैं, लेकिन डॉक्टर के लिए ज़्यादा काम की चीज़ रफ़्तार है, यानी हर महीने कितने सेंटीमीटर जुड़ रहे हैं। मोटे तौर पर पैटर्न ऐसा रहता है:
- जन्म से 3 महीने: करीब 3 से 4 सेमी हर महीने। यह पूरी ज़िंदगी की सबसे तेज़ रफ़्तार है।
- 3 से 6 महीने: करीब 2 सेमी हर महीने।
- 6 से 12 महीने: करीब 1 से 1.5 सेमी हर महीने।
- 1 से 2 साल: करीब 1 सेमी हर महीने।
जोड़कर देखें तो ज़्यादातर बच्चे पहले साल में करीब 25 सेमी और दूसरे साल में करीब 12 सेमी बढ़ते हैं। ये औसत हैं और इनके आसपास बहुत बड़ा दायरा पूरी तरह सामान्य है। किसी बच्चे में पहले साल 22 सेमी बढ़त होती है, किसी में 28, और दोनों अपनी-अपनी रेखा पर आराम से चल रहे होते हैं।
दूसरी बात, ग्रोथ स्मूद नहीं होती। बच्चे झटकों में बढ़ते हैं। तीन हफ़्ते कुछ नहीं होता, फिर एक हफ़्ते में अचानक सारे रोमपर छोटे पड़ जाते हैं। इसीलिए महीने-दर-महीने का हिसाब अक्सर परेशान करता है, जबकि तीन-चार महीने की लाइन शांत और साफ़ दिखती है।
सबसे ज़रूरी बात: लंबाई सबसे कम भरोसेमंद नाप है
वज़न नापना आसान है। बच्चे को तराजू पर रखिए, नंबर आ गया। सिर का घेरा भी टेप से एक बार में हो जाता है। लंबाई अलग चीज़ है, और यही इस पूरे पन्ने की सबसे काम की जानकारी है: बच्चे पर ली जाने वाली सारी नापों में लंबाई सबसे कम भरोसेमंद होती है।
ठीक से नापने के लिए ये सब एक साथ चाहिए:
- एक सपाट और कड़ा बोर्ड, गद्दा या तह की हुई चादर नहीं। क्लीनिक में इसे लंबाई नापने का बोर्ड कहा जाता है।
- दो लोग। अकेला इंसान सही नाप ले ही नहीं सकता।
- एक व्यक्ति सिर को ऊपर वाले फ़िक्स सिरे से सटाकर सीधा पकड़े रखे, बच्चे की नज़र ऊपर की तरफ़ रहे।
- दूसरा व्यक्ति दोनों टाँगें धीरे से सीधी करे, घुटनों को हल्के हाथ से दबाकर सपाट रखे और तलवों को 90 डिग्री पर टिकाए।
- और इस पूरे वक़्त बच्चा टाँगें मोड़ रहा है, पीठ उठा रहा है और रो रहा है।
असल ज़िंदगी में, भीड़ भरी ओपीडी में, टीकाकरण की लाइन के बीच यह सब मुश्किल से हो पाता है। कई जगह बच्चे के ऊपर बिस्तर पर टेप रख दिया जाता है या नर्स अकेले ही नाप लेती हैं। ऐसे में एक से दो सेंटीमीटर की गलती बिलकुल आम है। यह किसी की लापरवाही नहीं, इस नाप की प्रकृति है।
एक से दो सेंटीमीटर सुनने में छोटा लगता है, पर छह महीने के बाद जब बच्चा महीने में करीब एक सेंटीमीटर बढ़ रहा हो, तब दो सेंटीमीटर की गलती दो महीने की पूरी ग्रोथ के बराबर होती है। इसी वजह से चार्ट पर बिंदु उछलते-कूदते दिखते हैं, जबकि बच्चा अंदर से एकदम स्थिर रफ़्तार से बढ़ रहा होता है।
घर पर टेप से नापी गई लंबाई को चार्ट पर लगाने का फ़ायदा कम और चिंता ज़्यादा होती है। घर की नाप में गलती और भी बड़ी होती है। चार्ट के लिए हमेशा क्लीनिक में बोर्ड पर ली गई नाप को ही मानें।
चार्ट पर लंबाई "कम" कैसे हो जाती है
बहुत से माता-पिता यह देखकर घबरा जाते हैं कि पिछली विज़िट में लंबाई ज़्यादा लिखी थी और इस बार कम। यहाँ जवाब सीधा है: बच्चे छोटे नहीं होते। लंबाई घटती नहीं है। अगर नंबर कम आया है तो फ़र्क नाप में आया है, बच्चे में नहीं।
अलग व्यक्ति, अलग बोर्ड, बच्चे का ज़्यादा मचलना, टाँगों का पूरा सीधा न होना, यह सब नंबर बदल देता है। ऐसे में सही कदम अगले हफ़्ते भर चिंता करना नहीं, बल्कि वहीं मौके पर दोबारा नापने के लिए कहना है।
विज़िट पर यह एक वाक्य याद रखें: "पिछली बार से लंबाई कम आ रही है, एक बार दोबारा नाप लेंगे?" ज़्यादातर स्टाफ़ खुशी से दोबारा नाप देते हैं। दोनों में से जो नाप ज़्यादा सावधानी से ली गई हो, वही सच के करीब होती है।
दो साल पर नाप का तरीका बदल जाता है
करीब दो साल की उम्र पर बच्चे को लेटाकर नापना बंद करके खड़ा करके नापा जाने लगता है। खड़े होने पर रीढ़ थोड़ी दब जाती है, इसलिए वही बच्चा खड़े होकर लेटने के मुक़ाबले थोड़ा छोटा नापा जाता है, आमतौर पर आधे से एक सेंटीमीटर के बीच।
इसका मतलब है कि दो साल के आसपास चार्ट पर नीचे की तरफ़ एक छोटी सी सीढ़ी दिख सकती है। यह असली कमी नहीं है और इसमें करने को कुछ नहीं होता। यह सिर्फ़ नापने के तरीके का बदलाव है, और इसीलिए दो साल पर चार्ट भी बदल जाता है, जिसकी नई रेखाएँ खड़े होकर ली गई हाइट के लिए बनी होती हैं।
लंबाई, वज़न और सिर का घेरा: तीनों साथ में देखें
अकेली लंबाई अधूरी कहानी है। डॉक्टर तीनों नापों को एक साथ देखते हैं और सबसे ज़्यादा ध्यान इस बात पर देते हैं कि तीनों आपस में तालमेल में चल रही हैं या नहीं।
कुछ बच्चे लंबे और दुबले होते हैं, कुछ छोटे और भरे हुए। यह शरीर का ढाँचा है, अच्छा या बुरा नहीं। इसीलिए वज़न को अकेले देखने की जगह "लंबाई के हिसाब से वज़न" देखा जाता है। जो बच्चा देखने में पतला लगता है, वह अपनी लंबाई के हिसाब से बिलकुल ठीक बैठ सकता है।
यहाँ एक बात साफ़ कर देनी ज़रूरी है: किसी नंबर को ऊपर-नीचे करने के लिए बच्चे के खाने-पीने में ख़ुद से बदलाव न करें। ऊपर से फ़ॉर्मूला जोड़ना, दूध पतला या गाढ़ा करना, ठोस आहार जल्दी शुरू कर देना या कम कर देना, ये फ़ैसले चार्ट देखकर घर पर नहीं लिए जाते। खाने से जुड़ा कोई भी बदलाव आपके डॉक्टर का काम है।
परिवार की लंबाई सबसे बड़ा कारण है
बच्चा किस रेखा के आसपास चलेगा, इसमें माँ-बाप की लंबाई का बहुत बड़ा हाथ होता है। छोटे कद के माता-पिता का बच्चा अगर चार्ट की निचली तरफ़ चल रहा है और अपनी ही रेखा के साथ लगातार ऊपर बढ़ रहा है, तो अक्सर वह सिर्फ़ अपने परिवार का पैटर्न दोहरा रहा होता है। यही बात लंबे परिवारों में ऊपर की तरफ़ लागू होती है।
और एक बात जो कम लोग बताते हैं: पहले साल का लंबाई वाला पर्सेंटाइल यह भरोसे से नहीं बता सकता कि बच्चा बड़ा होकर कितना लंबा होगा। पहले दो साल में बच्चे अपनी असली पारिवारिक रेखा की तरफ़ खिसकते हैं, और इस दौरान ऊपर या नीचे जगह बदलना काफ़ी आम है। जन्म के समय की लंबाई तो काफ़ी हद तक गर्भ के हालात पर भी निर्भर करती है, न कि सिर्फ़ जीन पर।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए
एक अकेली नाप, चाहे वह जितनी भी अजीब लगे, अपने आप में चिंता की वजह नहीं होती। पैटर्न मायने रखता है। इन हालात में अपने डॉक्टर से बात करें:
- लंबाई की बढ़त कई महीनों तक लगभग रुकी हुई लगे, यानी चार्ट पर लाइन सपाट पड़ जाए।
- बच्चा चार्ट की दो बड़ी रेखाओं को पार करके नीचे आ जाए और वहीं बना रहे।
- लंबाई पीछे छूटने लगे जबकि वज़न अपनी जगह बनाए रखे, या इसका बिलकुल उल्टा हो।
- लंबाई और सिर के घेरे की चाल आपस में मेल न खाए।
- बार-बार नापने पर भी नंबर बहुत उछल-कूद करे और किसी को यकीन न हो कि सही नाप कौन सी है।
- लंबाई के साथ-साथ खाने में दिक्कत, ज़्यादा सुस्ती, बार-बार बीमार पड़ना या विकास के पड़ाव देर से आना भी दिखे।
इनमें से कोई भी बात अपने आप में यह नहीं बताती कि आपके बच्चे को क्या है। ये सिर्फ़ इशारे हैं कि किसी को पूरा बच्चा देखना चाहिए। सिर्फ़ आपके अपने डॉक्टर, जो बच्चे को सामने देख रहे हैं, उसका इतिहास जानते हैं और ज़रूरत पड़ने पर जाँच करा सकते हैं, यह बता सकते हैं कि क्या सामान्य है और क्या नहीं। इंटरनेट पर मौजूद कोई टेबल, यह पन्ना भी नहीं, यह काम नहीं कर सकता।
हर नाप एक जगह, ताकि ट्रेंड दिखे
BabyMind में आप हर विज़िट के बाद लंबाई, वज़न और सिर का घेरा दर्ज कर सकते हैं और समय के साथ उनका ट्रेंड देख सकते हैं। यह WHO की आधिकारिक पर्सेंटाइल रेखाएँ नहीं बनाता, कोई जाँच या निदान नहीं करता, और क्लीनिक में होने वाली नाप की जगह नहीं लेता। यह बस आपके नंबर एक जगह रखता है, ताकि अगली विज़िट पर आप डॉक्टर को पूरा रिकॉर्ड दिखा सकें।
BabyMind डाउनलोड करेंसमय से पहले जन्मे बच्चों पर ये रेखाएँ सीधे लागू नहीं होतीं। उनके लिए करेक्टेड ऐज, यानी ड्यू डेट से गिनी गई उम्र, या डॉक्टर का दिया अलग चार्ट इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपका बच्चा समय से पहले हुआ है तो चार्ट पर बिंदु लगाने से पहले पूछ लें कि उम्र किस दिन से गिननी है।
आख़िर में यह याद रखें कि चार्ट का काम आपको डराना नहीं, आपके डॉक्टर को दिशा दिखाना है। अच्छी लाइन वह है जो अपनी ही चाल से ऊपर जाती रहे, चाहे वह चार्ट में ऊपर की तरफ़ हो या नीचे की।